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बलरामपुर: मीडिया की खबर का बड़ा असर: गेहूं पर टुल्लू पंप से पानी डालकर वजन बढ़ाने का मामला उजागर, केंद्र प्रभारी निलंबित। 

मीडिया की खबर का बड़ा असर: गेहूं पर टुल्लू पंप से पानी डालकर वजन बढ़ाने का मामला उजागर, केंद्र प्रभारी निलंबित। 

गुलाम नबी कुरैशी, संवाददाता 

बलरामपुर। बलरामपुर जिले के राज्य भंडारगृह खुटेहना में गेहूं के भंडारित स्टॉक का वजन बढ़ाने के लिए टुल्लू पंप से पानी डालने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए 19 सेकेंड के वीडियो को मीडिया द्वारा प्रमुखता से प्रसारित किए जाने के बाद मामला तूल पकड़ गया। जांच के बाद केंद्र प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा गया कि गेहूं की बोरियों के चट्टों पर चारों ओर से पाइप के जरिए पानी डाला जा रहा है। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया जानबूझकर स्टॉक का वजन बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही थी। वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन और खाद्य विपणन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रादेशिक क्षेत्रीय प्रबंधक, क्षेत्रीय कार्यालय अयोध्या (देवीपाटन) और जिला खाद्य विपणन अधिकारी बलरामपुर की संयुक्त टीम ने 10 जनवरी 2026 को भंडारगृह खुटेहना पहुंचकर जांच की। संयुक्त जांच आख्या में यह स्पष्ट किया गया कि केंद्र पर भंडारित गेहूं के चट्टों पर जानबूझकर पानी डाला गया था, जिससे गेहूं के वजन में कृत्रिम रूप से बढ़ोतरी की जा सके।

जांच के दौरान केंद्र प्रभारी एवं प्राविधिक सहायक त्रियुगी नारायण शुक्ला द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण जांच समिति को संतोषजनक नहीं लगा। उनकी भूमिका को संदिग्ध मानते हुए कड़ी विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई।

इसके बाद क्षेत्रीय प्रबंधक, अयोध्या द्वारा जिलाधिकारी बलरामपुर से वार्ता कर प्राप्त निर्देशों के क्रम में अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया गया। क्षेत्रीय प्रबंधक अयोध्या ने कार्यालय पत्रांक 3408, दिनांक 12 जनवरी 2026 के माध्यम से संयुक्त जांच आख्या भेजते हुए त्रियुगी नारायण शुक्ला को उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम कर्मचारी वर्ग विनियमावली 2021 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

इस मामले में सुभाष चंद्र पांडेय, उप प्रबंधक, क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर को जांच अधिकारी नामित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान आरोपी कर्मचारी को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद दोष सिद्ध होने की स्थिति में और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि मीडिया की सक्रियता से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर कैसे सख्त कदम उठाने के लिए प्रशासन को मजबूर होना पड़ता है।

 

 

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