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सहसवान नगर और देहात क्षेत्रों में मिलावटी तेल की धड़ल्ले से बिक्री, विभागीय कार्रवाई नदारद, तेल माफियाओं के हौंसले बुलंद।

नगर और देहात क्षेत्रों में मिलावटी तेल की धड़ल्ले से बिक्री।

विभागीय कार्रवाई नदारद, तेल माफियाओं के हौंसले बुलंद।

जनता की जेब पर डाका, स्वास्थ्य से खिलवाड़।

सहसवान (बदायूँ)। नगर और देहात के बाजारों में इन दिनों सरसों के तेल के नाम पर मिलावटी तेल की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। पीले और चमकदार रंग का यह तेल दिखने और महक में बिल्कुल असली सरसों जैसा लगता है, लेकिन हकीकत यह है कि इसमें पॉम ऑयल, राइस ब्रान और खतरनाक केमिकल की मिलावट की जा रही है। यह नकली तेल उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ तो डाल ही रहा है, साथ ही स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी बन गया है।

कई मोहल्लों और गांवों में गुपचुप कारोबार।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सहसवान नगर के मोहल्ला शहवाज़पुर, सैफुल्लाहगंज, मोहद्दीनपुर, पठानटोला समेत कई इलाकों में यह मिलावटी तेल खुलेआम बेचा जा रहा है। यही नहीं, आस-पास के देहात क्षेत्रों में भी स्पेलरों की आड़ में इसका कारोबार जोरों पर है। सूत्रों का कहना है कि बड़ी मात्रा में यह पॉम ऑयल और राइस ब्रान तेल सम्भल और चन्दौसी से मंगाया जाता है और फिर यहां मिलावट करके सप्लाई किया जाता है।

कैसे होता है तेल में मिलावट?

जानकारों के मुताबिक माफिया असली सरसों के तेल में दो से तीन गुना तक पॉम ऑयल और राइस ब्रान तेल मिला देते हैं। चूंकि इन तेलों की कोई गंध नहीं होती, इसलिए इसमें एक कृत्रिम सरसों की खुशबू और पीला केमिकल युक्त रंग डाल दिया जाता है, जिससे यह बिल्कुल सरसों का तेल जैसा दिखाई देने लगता है। इसके बाद इसे बाजार में शुद्ध सरसों के तेल के नाम पर बेचा जाता है।

दामों का खेल और मुनाफाखोरी।

पॉम ऑयल की कीमत लगभग ₹50–55 प्रति लीटर और राइस ब्रान तेल की कीमत ₹40–45 प्रति लीटर है। वहीं शुद्ध सरसों का तेल इससे लगभग दोगुनी कीमत पर बिकता है। तेल माफिया सस्ता तेल मिलाकर उसे सरसों के नाम पर बेच देते हैं और कई गुना मुनाफा कमाते हैं। उपभोक्ताओं को नकली तेल तो मिलता है, लेकिन कीमत वे शुद्ध सरसों की ही चुकाते हैं।

स्वास्थ्य के लिए खतरनाक।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का मिलावटी तेल धीरे-धीरे शरीर में गंभीर बीमारियों को जन्म देता है। लगातार सेवन से हृदय रोग, लीवर की समस्या, ब्लड प्रेशर और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। बावजूद इसके विभागीय लापरवाही के चलते यह गोरखधंधा लगातार फल-फूल रहा है।

प्रशासन और विभाग पर सवाल।

नगर और देहात में मिलावटी तेल की यह सप्लाई खुलेआम जारी है। खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन की नाक के नीचे तेल माफिया करोड़ों का कारोबार कर रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर फाइलों में खानापूर्ति तो होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सख्त कदम उठता नजर नहीं आता।

जनता में आक्रोश, कब होगा समाधान?

स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरत का सामान अब मिलावटी होकर मिलने लगा है। पहले दूध और मिठाइयों में मिलावट की खबरें आती थीं, अब तेल में मिलावट आम हो चुकी है। सवाल यह है कि आखिर विभाग कब जागेगा और आम उपभोक्ताओं की सेहत से हो रहे इस खिलवाड़ पर रोक लगाएगा?

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