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कादरगंज गंगा नदी में छोड़ी गईं 2.35 लाख मत्स्य अंगुलिकाएं।

कादरगंज गंगा नदी में छोड़ी गईं 2.35 लाख मत्स्य अंगुलिकाएं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत हुआ संचय कार्यक्रम, जिला पंचायत अध्यक्ष रत्नेश कश्यप रहीं मुख्य अतिथि।

जुम्मन कुरैशी, संवाददाता 

कासगंज। कासगंज जनपद के गंजडुंडवारा ब्लॉक क्षेत्र के कादरगंज गंगा घाट पर बुधवार को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 2.35 लाख मत्स्य अंगुलिकाओं का संचय किया गया। यह कार्यक्रम मत्स्य विभाग कासगंज द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष रत्नेश कश्यप ने भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने पैकिटों के माध्यम से गंगा नदी में मत्स्य अंगुलिकाओं का संचय किया। यह पहल नदियों की निर्मलता बढ़ाने, नाइट्रोजन युक्त प्रदूषण को कम करने और जलीय पर्यावरण को संतुलित रखने के उद्देश्य से की गई है।

जिला पंचायत अध्यक्ष रत्नेश कश्यप ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप गंगा नदी के जल संतुलन को बनाए रखने के लिए यह अभियान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मत्स्य अंगुलिकाओं के संचय से न केवल गंगा की स्वच्छता बढ़ेगी, बल्कि यह मछलियाँ बड़े होकर नदी में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद करेंगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ नदियों की पारिस्थितिक व्यवस्था को सुदृढ़ करना है।

कार्यक्रम में अलीगढ़/आगरा मंडल के उप निदेशक मत्स्य डॉ. हरेंद्र प्रसाद, मत्स्य पालक विकास अभिकरण कासगंज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल कुमार और मत्स्य विभाग कासगंज के अधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में निषाद पार्टी के पदाधिकारी, स्थानीय ग्रामीण, समुदाय के सदस्य और मत्स्य पालक मौजूद रहे।

इस दौरान उप निदेशक मत्स्य डॉ. हरेंद्र प्रसाद ने मत्स्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य योजना, मत्स्य पालक कल्याण कोष योजना और निषाद राज बोट सब्सिडी योजना जैसी योजनाएँ मत्स्य पालकों के जीवन में आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। उन्होंने किसानों और मत्स्य पालकों से अपील की कि वे सरकार की इन योजनाओं का लाभ उठाकर मत्स्य पालन को आय का सशक्त माध्यम बनाएं।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष रत्नेश कश्यप ने मत्स्य विभाग की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम नदियों की जैव विविधता को बचाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने आशा जताई कि गंगा नदी में छोड़ी गई ये मत्स्य अंगुलिकाएं भविष्य में नदी की स्वच्छता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगी। कार्यक्रम का समापन बुधवार शाम करीब साढ़े छह बजे हुआ, जिसके बाद मत्स्य विभाग ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी मीडिया को उपलब्ध कराई।

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