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बरेली: डीएम कार्यालय के बाहर परिवार सहित आत्मदाह का प्रयास, सतर्कता से टला बड़ा हादसा।

बरेली: डीएम कार्यालय के बाहर परिवार सहित आत्मदाह का प्रयास, सतर्कता से टला बड़ा हादसा।

संवाददाता, मोहम्मद वसीम 

बरेली। बरेली कलेक्ट्रेट परिसर में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सरकारी रास्ते के विवाद से परेशान एक ग्रामीण अपनी पत्नी और मासूम बेटी के साथ आत्मदाह करने पहुंच गया। परिवार ने खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डाल लिया था और वे आग लगाने ही वाले थे कि ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़ी त्रासदी को होने से पहले ही रोक लिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मीरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम खमरिया साहनी निवासी 47 वर्षीय लाल सिंह गंगवार अपनी पत्नी राजरानी (46) और आठ वर्षीय बेटी नंदनी के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचते ही तीनों ने खुद पर ज्वलनशील पदार्थ उड़ेल लिया। इसी बीच, वहां तैनात इंटेलिजेंस विभाग के ओमपाल सिंह, एलआईयू के अमित कुमार और होमगार्ड संदीप मिश्रा की नजर उन पर पड़ी। तीनों सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल फुर्ती दिखाते हुए दौड़कर परिवार को काबू में लिया और आत्मदाह की कोशिश को नाकाम कर दिया। इस घटना के बाद मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों और भारी पुलिस बल की तैनाती हो गई।

पूछताछ में लाल सिंह ने बताया कि वह अपने गांव में सरकारी खड़ंजा मार्ग को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद से अत्यंत परेशान है। उसका आरोप है कि गांव के कुछ दबंगों ने सार्वजनिक रास्ते पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, जहां वे वाहन खड़े करते हैं, पशु बांधते हैं और लकड़ी के ढेर लगाकर आवागमन बाधित करते हैं। लाल सिंह का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण वह मानसिक तनाव में था।

इस मामले से जुड़ी जांच रिपोर्टों में विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक राजस्व जांच में रास्ते पर अस्थायी अतिक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि दूसरे पक्ष ने इसे वर्ष 1959 के बैनामे के आधार पर अपनी निजी संपत्ति बताया है। अधिकारियों का तर्क है कि वर्ष 1986 में हुई चकबंदी के बाद पुराने बैनामों की वैधता स्पष्ट नहीं हो पा रही है। वहीं, राजस्व विभाग की एक अन्य रिपोर्ट में इस जमीन को आबादी भूमि का विवाद बताते हुए दावा किया गया है कि मानचित्र में यह रास्ता दर्ज नहीं है और शिकायतकर्ता के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध है।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन ने परिवार को सुरक्षित हिरासत में ले लिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। कलेक्ट्रेट परिसर में घटी इस घटना ने प्रशासनिक ढिलाई और ग्रामीण विवादों के समाधान में देरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं

 

 

 

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