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जैविक खेती अपनाकर मृदा और पर्यावरण संरक्षण में करें सहयोग: डॉ. अरविंद कुमार सिंह।

उसावां में जैविक किसान मेला एवं गोष्ठी आयोजित, किसानों को जैविक खेती के तरीके और सरकारी अनुदान की दी गई जानकारी।

बदायूं। उत्तर प्रदेश क्रॉप डायवर्सिफिकेशन सपोर्ट प्रोजेक्ट (यूपी डास्प) की ओर से संचालित नमामि गंगे जैविक खेती (ईओएफसी) योजना के अंतर्गत गठित समूहों के सदस्यों के लिए विकासखंड परिसर उसावां में तृतीय वर्ष का एक दिवसीय जैविक किसान मेला एवं गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन कार्यदायी संस्था बायोसर्ट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड ने दातागंज विधायक प्रतिनिधि डॉ. अरविंद कुमार सिंह की अध्यक्षता में किया।

कार्यक्रम में जिला परियोजना समन्वयक, यूपी डास्प ने किसानों को रासायनिक खेती से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने जैविक खेती की विभिन्न विधियों, इसमें आने वाली समस्याओं और उनके समाधान के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही अनुदान राशि की जानकारी भी दी।

वरिष्ठ गन्ना निरीक्षक डॉ. पी.के. वर्मा ने जैविक विधि से फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में बताया। उन्होंने कृषि वैज्ञानिक संवाद के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान भी किया। वहीं, सहायक कृषि विकास अधिकारी (कृषि) डॉ. महेश पाल सिंह ने जैविक विधि से दीमक और फफूंदजनित रोगों की रोकथाम के उपाय बताए।

नमामि गंगे के जिला प्रभारी लवकुश मिश्रा ने जैविक तरीके से पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा जनित रोगों के नियंत्रण और फसल सुरक्षा के संबंध में किसानों को जागरूक किया। कार्यक्रम के अंत में जिला परियोजना समन्वयक, यूपी डास्प ने किसानों से जैविक खेती अपनाकर मृदा एवं पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने इस दिशा में किसानों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।

किसानों के जैविक उत्पादों के विपणन और बिक्री को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मेले में जैविक उत्पादों की प्रदर्शनी एवं स्टॉल लगाए गए। इनके माध्यम से किसानों को अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार और स्थानीय बाजार में बिक्री के अवसरों की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर सहायक कृषि विकास अधिकारी (कृषि) महेश पाल सिंह, वीटीएम उसावां, पीपीएस उसावां, नमामि गंगे के जिला प्रभारी लवकुश मिश्रा, प्रमाणीकरण संस्था के अवधेश कुमार सिंह एवं पुनीत शर्मा, गठित समूहों के सदस्य, किसान तथा सहयोगी संस्था बायोसर्ट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के क्षेत्रीय कर्मचारी मौजूद रहे।

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