Breaking News

16 से 30 नवंबर तक खुद कर सकेंगे परिवार की ऑनलाइन जनगणना, बदायूं में 5,929 प्रगणक संभालेंगे जिम्मेदारी।

जनगणना-2027 के लिए 26 चार्ज निर्धारित, 1,003 पर्यवेक्षक भी होंगे तैनात; कोई दस्तावेज, ओटीपी या शुल्क नहीं मांगा जाएगा।

बदायूं। जनगणना-2027 डिजिटल माध्यम से संपन्न कराई जाएगी। इसके प्रथम चरण में 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक आमजन आधिकारिक पोर्टल [https://se.census.gov.in/](https://se.census.gov.in/?utm_source=chatgpt.com) पर जाकर अपने परिवार की जानकारी स्वयं ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। स्व-गणना पूरी होने के बाद प्राप्त एसई आईडी को सुरक्षित रखना होगा और घर आने वाले प्रगणक को उपलब्ध कराना होगा। इसके बाद 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक प्रगणक घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना करेंगे।

शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जनगणना-2027 के द्वितीय चरण यानी जनसंख्या गणना के सफल संचालन और व्यापक प्रचार-प्रसार को लेकर मुख्य विकास अधिकारी गामिनी सिंगला ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने मीडिया से वार्ता कर जनगणना कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी और आमजन से इसमें सहयोग करने की अपील की।

5,929 प्रगणक और 1,003 पर्यवेक्षक होंगे तैनात

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व महेंद्र श्रीवास्तव ने जनगणना की कार्यप्रणाली, समय-सारणी, स्व-गणना की प्रक्रिया और आमजन की सहभागिता के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनपद बदायूं में जनगणना कार्य के लिए कुल 26 चार्ज निर्धारित किए गए हैं। इनमें पांच तहसील चार्ज, सात नगर पालिका परिषद और 14 नगर पंचायत शामिल हैं। जनगणना संपन्न कराने के लिए जिले में कुल 5,929 प्रगणक और 1,003 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि गणना के दौरान परिवार और उसके सदस्यों से निर्धारित 40 प्रश्नों के माध्यम से आवश्यक जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद 5 जनवरी से 9 जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण चरण चलेगा। इस अवधि में जन्म और मृत्यु से संबंधित विवरण संकलित कर आंकड़ों को अद्यतन किया जाएगा। जनगणना में बेघर व्यक्तियों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति गणना से वंचित न रहे।

न दस्तावेज मांगे जाएंगे, न ओटीपी और न ही लिया जाएगा शुल्क

बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान किसी भी व्यक्ति से कोई दस्तावेज, प्रमाण पत्र या अन्य कागजात नहीं मांगे जाएंगे। इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। गणना के दौरान किसी से ओटीपी भी नहीं मांगी जाएगी। लोगों को आगाह किया गया कि वे अपनी ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।

प्रगणकों द्वारा प्राप्त की जाने वाली सभी सूचनाएं पूरी तरह गोपनीय रखी जाएंगी। आमजन की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रगणकों के पहचान पत्र पर क्यूआर कोड भी उपलब्ध रहेगा। इसे स्कैन करके प्रगणक की पहचान और प्रामाणिकता का सत्यापन किया जा सकेगा। अधिकारियों ने लोगों से निर्धारित समय पर स्व-गणना करने और घर पहुंचने वाले प्रगणकों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की।

 

 

Spread the love

Check Also

पेंशनर 1 नवंबर से ऑनलाइन जमा कर सकेंगे डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र।

राष्ट्रीय डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र अभियान शुरू, वरिष्ठ कोषाधिकारी ने पेंशनरों से समय पर प्रमाण-पत्र जमा …