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तेंदुए से भिड़ने वाली जांबाज बेटी से मिले खिलाड़ी, आर्थिक मदद देकर बढ़ाया हौसला, वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में उबाल।

तेंदुए से भिड़ने वाली जांबाज बेटी से मिले खिलाड़ी, आर्थिक मदद देकर बढ़ाया हौसला, वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में उबाल।

संवाददाता, मोहम्मद कमर 

लखीमपुर खीरी। जनपद में तेंदुए के हिंसक हमले का शिकार हुई बहादुर बिटिया का हालचाल जानने और उसका मनोबल बढ़ाने के लिए गुरुनानक स्पोर्ट्स एकेडमी की टीम आगे आई है। एकेडमी की सचिव तृप्ति अवस्थी और अध्यक्ष सुरेंद्र तोलानी के नेतृत्व में तमाम खिलाड़ियों ने ओयल अस्पताल पहुंचकर घायल बच्ची से मुलाकात की।

इस दौरान खेल जगत से जुड़े लोगों ने इस जांबाज बिटिया के अदम्य साहस और वीरता की सराहना करते हुए उसे शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उसके जल्द से जल्द पूर्ण स्वस्थ होने की कामना की। इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए एकेडमी के अध्यक्ष सुरेंद्र तोलानी ने बिटिया के इलाज और परिवार की अन्य तात्कालिक जरूरतों के लिए नकद आर्थिक सहायता भी प्रदान की, जिसे देखकर अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों और परिजनों ने खिलाड़ियों की इस मानवीय पहल का आभार जताया।

दूसरी ओर, इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना के बाद से पूरे ग्रामीण इलाके में जबरदस्त दहशत और खौफ का माहौल बना हुआ है। मामले को लेकर गोला रेंज वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घटना की सूचना मिलते ही वन्यजीव विशेषज्ञों की एक विशेष टीम को तुरंत मौके पर रवाना किया गया था, जिसने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर हिंसक जानवर के पगमार्क (पदचिह्न) सुरक्षित किए हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच और पदचिह्नों के मिलान से हमला करने वाला जानवर तेंदुआ ही प्रतीत हो रहा है। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए भरोसा दिया है कि घायल बालिका को सरकारी नियमावली के तहत मिलने वाली पूरी मुआवजा राशि और सहायता जल्द से जल्द दिलाने की कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

सरकारी दावों के उलट, वन्यजीवों की लगातार बढ़ती आमद को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में वन विभाग के सुस्त रवैये के खिलाफ भारी नाराजगी और उबाल देखने को मिल रहा है। आक्रोशित ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस पूरे इलाके में पिछले काफी समय से तेंदुए की चहलकदमी देखी जा रही थी, जिसकी लिखित और मौखिक शिकायतें कई बार रेंज कार्यालय में की गईं, लेकिन कुंभकर्णी नींद सो रहे विभाग ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

वन विभाग की इसी घोर लापरवाही की कीमत आज एक मासूम बच्ची को अपनी जान जोखिम में डालकर चुकानी पड़ी है। खेतों में काम करने वाले किसानों, महिलाओं और स्कूल जाने वाले बच्चों में बने इस गहरे खौफ को देखते हुए ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वन विभाग तत्काल पिंजरा लगाकर आदमखोर तेंदुए को पकड़े और प्रभावित गांवों में नियमित गश्त शुरू करे, अन्यथा ग्रामीण सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

 

 

 

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