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पुत्तन खां फहमी की दूसरी पुण्यतिथि पर मुशायरे का आयोजन, शायरों ने पेश किए कलाम।

पुत्तन खां फहमी की दूसरी पुण्यतिथि पर मुशायरे का आयोजन, शायरों ने पेश किए कलाम।

आई एम खान 

बिसौली। नगर में अंजुमन-ए-आसी की ओर से पुत्तन खां फहमी की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें शायरों और कवियों ने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हाजी सगीर साहब ने की, जबकि संचालन श्रीदत्त शर्मा मुजतर ने किया। महफिल का आगाज शमा रोशन कर किया गया और नात-ए-पाक पेश करने के बाद मुशायरे की शुरुआत हुई।

मुशायरे में नरेंद्र पाठक अभाषित ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से जीवन के संघर्ष और अनुभवों को बयां किया—

जो हलाहल को पीना नहीं जानता, स्वेद श्रम का पसीना नहीं जानता। पांव जिसका पड़ा शूल पर न कभी, वो हकीकत में जीना नहीं जानता।

मशहूद खां हमदम ने जिंदगी और पारसाई पर अपने अशआर पेश किए। वहीं अभीक्ष पाठक आहत ने दिल के जख्मों को बयां करते हुए कहा—

वक्त की चारासाजियां आहत, जख्म नासूर हो गया दिल का।

श्रीदत्त शर्मा मुजतर ने प्रेम पर शेर सुनाते हुए कहा—

अक्ल को साथ लिए फिरता है, तुझसे होगा न प्यार, रहने दे।

मशकूर अहमद नज्मी ने बिछड़ने के दर्द को अपने कलाम में पिरोया। अमीर उद्दीन अमीर ने इश्क और इम्तिहान पर शेर सुनाकर दाद बटोरी। फहीम अमीर, फरीद इदरीसी और शब्बर खां शब्बर ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। उनकी रचनाओं पर श्रोताओं ने खूब सराहना की।

माजिद सलमानी ने हजरत आसी की याद में शेर पढ़ते हुए कहा—

दफअतन चुप हो गए हजरते आसी मगर, आपकी आवाज गूंजेगी फिजा में उम्र भर।

कार्यक्रम में काजी शाहनवाज खान, एडवोकेट दीपक साहनी, एडवोकेट शशांक अग्रवाल सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। मुशायरे में शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य, प्रेम, जिंदगी और जज्बातों को खूबसूरती से प्रस्तुत किया।

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