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भोजीपुरा: 17 चाकू के वार से किराना व्यापारी की हत्या का 72 घंटे में खुलासा, आरोपी बेटा गिरफ्तार; चौंकाने वाली वजह आई सामने।

भोजीपुरा: 17 चाकू के वार से किराना व्यापारी की हत्या का 72 घंटे में खुलासा, आरोपी बेटा गिरफ्तार; चौंकाने वाली वजह आई सामने।

संवाददाता, मोहम्मद वसीम 

बरेली। बरेली के भोजीपुरा थाना क्षेत्र के धौराटांडा में 60 वर्षीय किराना व्यापारी सियाराम श्रीवास्तव की नृशंस हत्या का पुलिस ने 72 घंटे के भीतर बड़ा खुलासा किया है। शुरुआती जांच में मामले को संपत्ति विवाद से जोड़ा जा रहा था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों ने पूरी कहानी ही पलट दी। पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद अरमान और सबूत छिपाने के आरोप में उसके पिता इम्तियाज अहमद को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के पास से हत्या में प्रयुक्त ओमनी वैन, चाकू, मृतक का मोबाइल फोन, आधार कार्ड, नकदी और खून से सने कपड़े बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, 24 जुलाई को धौराटांडा के पास सड़क किनारे सियाराम श्रीवास्तव का लहूलुहान शव मिला था। मृतक के बेटे सुरेश श्रीवास्तव की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से एक सफेद रंग की ओमनी वैन संदिग्ध पाई गई, जिससे पुलिस मुख्य आरोपी मोहम्मद अरमान तक पहुंच गई।

सोमवार तड़के भोजीपुरा पुलिस और एसओजी ने आटामांडा तिराहे के पास घेराबंदी कर अरमान को दबोच लिया। पूछताछ में उसने कबूला कि वह नशे का आदी है और रुपये की तलाश में वैन लेकर निकला था। बिबियापुर रोड पर अकेले जा रहे सियाराम श्रीवास्तव को उसने पहले वैन से टक्कर मारी और जमीन पर गिरने के बाद उन पर चाकू से 17 ताबड़तोड़ वार कर उनकी जान ले ली। इसके बाद वह मृतक का मोबाइल, आधार कार्ड और नकदी लूटकर फरार हो गया था।

पूछताछ के दौरान आरोपी अरमान ने पुलिस को गुमराह करने के लिए एक अजीब तर्क दिया। उसने दावा किया कि उसे “एक महिला जिन्न की आवाज” सुनाई देती थी जो उसे हत्या करने के लिए उकसाती थी। हालांकि, पुलिस का मानना है कि हत्या की मुख्य वजह उसकी नशे की लत और लूटपाट थी। एसपी उत्तरी मुकेश चंद मिश्रा ने बताया कि वारदात के बाद अरमान ने सारी बात अपने पिता इम्तियाज अहमद को बताई थी। दोनों ने मिलकर खून से सने कपड़े, चाकू और मृतक का सामान ओमनी वैन की सीट के नीचे छिपा दिया था और वाहन को एक राइस मिल में खड़ा कर दिया था। पुलिस को जब आरोपियों के पीलीभीत भागने की सूचना मिली, तो उससे पहले ही साक्ष्य छिपाने के आरोप में पिता को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इस सफल खुलासे में एसओजी और भोजीपुरा पुलिस टीम की अहम भूमिका रही।

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