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किसानों के समर्थन में बाजार बंदी की अपील बेअसर, मीना बाजार में सामान्य कारोबार।

व्यापार मंडल के आह्वान के बावजूद दोपहर ढाई बजे तक खुली रहीं अधिकांश दुकानें, पदाधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल।

संवाददाता, मोहम्मद वसीम 

बहेड़ी (बरेली)। किसानों के गन्ना भुगतान का मुद्दा आंदोलन के जरिए लगातार जोर पकड़ रहा है, लेकिन किसानों के समर्थन में बाजार बंद रखने की अपील को व्यापारियों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका। शुक्रवार को मीना बाजार में व्यापार मंडल की बंदी की अपील के बावजूद अधिकांश दुकानें खुली रहीं और सामान्य दिनों की तरह कारोबार होता रहा। दोपहर करीब ढाई बजे तक भी बाजार में बंदी का खास असर दिखाई नहीं दिया। इससे व्यापार मंडल के आह्वान और जमीनी स्थिति के बीच अंतर नजर आया।

दरअसल, गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने बन्ना गन्ना सोसाइटी में धरना-प्रदर्शन किया था। आंदोलन के समर्थन में व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष ने व्यापारियों से कुछ घंटों के लिए अपने प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि व्यापारी एकजुट होकर किसानों के समर्थन में बाजार बंद रखेंगे, लेकिन शुक्रवार को मीना बाजार की तस्वीर अलग नजर आई। इक्का-दुक्का दुकानें बंद रहीं, जबकि अधिकांश प्रतिष्ठानों पर ग्राहकों की आवाजाही और कारोबार सामान्य रूप से जारी रहा।

अपील करने वाले पदाधिकारी की दुकान खुली होने की चर्चा।

बाजार बंदी के घटनाक्रम में व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष की भूमिका भी चर्चा में रही। स्थानीय स्तर पर उनकी दुकान खुली होने की बात सामने आने के बाद व्यापारियों के बीच सवाल उठे कि जब संगठन की ओर से बंदी का आह्वान किया गया था, तो क्या संगठन के पदाधिकारियों ने स्वयं भी उसका पालन किया? हालांकि, इस संबंध में संबंधित पदाधिकारी का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में खुली दिखीं दुकानें।

इधर, मीना बाजार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें कई दुकानें खुली दिखाई दे रही हैं। इसे बंदी की अपील के बावजूद बाजार में सामान्य कारोबार होने के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, वीडियो की रिकॉर्डिंग का समय और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

किसानों के समर्थन में बाजार बंदी का आह्वान जिस एकजुटता की उम्मीद के साथ किया गया था, वह शुक्रवार को धरातल पर नजर नहीं आई। ऐसे में बाजार बंदी बेअसर रहने के साथ ही व्यापार मंडल की संगठनात्मक पकड़ और उसके आह्वान पर व्यापारियों की सहमति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल संबंधित पदाधिकारियों के स्पष्टीकरण का इंतजार है।

 

 

 

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