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सहसवान: कंधे के दर्द और जकड़न को न करें नजरअंदाज, फ्रोजन शोल्डर से राहत के लिए अपनाएं सही उपचार और जीवनशैली : डॉ. अमोल गुप्ता

कंधे के दर्द और जकड़न को न करें नजरअंदाज, फ्रोजन शोल्डर से राहत के लिए अपनाएं सही उपचार और जीवनशैली : डॉ. अमोल गुप्ता

संपादक, रवि कुमार शाक्य 

सहसवान, बदायूं। शरीर के किसी भी हिस्से का दर्द यदि समय पर ठीक न हो तो वह बड़ी परेशानी बन जाता है, खासकर जब बात कंधे के दर्द की हो। यदि आपको कंधे में लगातार दर्द रहता है, जकड़न महसूस होती है या हाथ को ऊपर उठाने तथा पीठ के पीछे ले जाने में कठिनाई आती है, तो इसे सामान्य समस्या समझकर टालना भारी पड़ सकता है। ये सारे लक्षण फ्रोजन शोल्डर यानी एडहेसिव कैप्सूलिटिस के हो सकते हैं। सही समय पर डॉक्टर की सलाह और उचित देखभाल से कंधे की कार्यक्षमता को फिर से बेहतर किया जा सकता है।

इस बारे में डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल सहसवान के होम्योपैथिक फिजिशियन एवं क्रॉनिक एंड स्किन डिजीज विशेषज्ञ डॉ. अमोल गुप्ता का कहना है कि फ्रोजन शोल्डर की स्थिति में कंधे के जोड़ के आसपास की झिल्ली में सूजन आ जाती है जिससे जकड़न बढ़ती है और हाथ की गतिविधियां सीमित हो जाती हैं। ऐसे मरीजों को कपड़े पहनने, बाल बनाने या रोजमर्रा के सामान्य काम करने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और कई बार रात के वक्त यह दर्द और अधिक बढ़ जाता है।

इस समस्या से उबरने में फिजियोथेरेपी की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। विशेषज्ञ की देखरेख में की जाने वाली हल्की स्ट्रेचिंग, पेंडुलम एक्सरसाइज और कंधे की मूवमेंट से जुड़ी गतिविधियां धीरे-धीरे दर्द कम करती हैं और जोड़ की गतिशीलता को लौटाने में मदद करती हैं। हालांकि इस दौरान यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि तेज दर्द होने पर कंधे को जबरन न खींचें और व्यायाम हमेशा मरीज की शारीरिक क्षमता के अनुसार ही बढ़ाएं।

व्यायाम के साथ-साथ नियंत्रित योगाभ्यास भी इस समस्या के प्रबंधन में काफी मददगार साबित हो सकते हैं। ताड़ासन के दौरान हाथों की धीमी गति और सरल शोल्डर रोटेशन जैसी क्रियाएं यदि दर्द की सहनीय सीमा के भीतर की जाएं तो लचीलापन बना रहता है। हालांकि किसी भी प्रकार के योग को शुरू करने से पहले अपनी स्थिति के बारे में विशेषज्ञ की राय जरूर ले लेनी चाहिए ताकि कंधे पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में भी इस तरह की मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं के लिए विभिन्न औषधियों पर विचार किया जाता है। चिकित्सक मरीज के लक्षणों, दर्द की प्रकृति और जकड़न के स्तर को देखते हुए रस्टॉक्स, ब्रायोनिया, आर्निका, रुटा और कॉस्टिकम जैसी दवाइयों के प्रयोग पर गौर करते हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि हर मरीज की तासीर और बीमारी की स्थिति अलग होती है इसलिए कोई एक दवा हर किसी पर लागू नहीं हो सकती और उपचार हमेशा व्यक्तिगत मूल्यांकन पर ही आधारित होना चाहिए।

विशेष तौर पर यह देखा गया है कि मधुमेह यानी शुगर के मरीजों में फ्रोजन शोल्डर की समस्या आम लोगों की तुलना में ज्यादा परेशान करती है। इसलिए डायबिटीज से पीड़ित लोगों को कंधे के दर्द या जकड़न को लेकर जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ताकि बीमारी शुरुआती चरण में ही नियंत्रित की जा सके।

डॉ. गुप्ता का यह भी सुझाव है कि कंधे को लंबे समय तक बिल्कुल निष्क्रिय रखना जकड़न को और बढ़ा सकता है। इसलिए उचित समय पर डॉक्टर की सलाह से सुरक्षित शारीरिक गतिविधियां जारी रखनी चाहिए। यदि अचानक बहुत तेज दर्द उठे, हाथ सुन्न पड़ने लगे या हाथ बिल्कुल भी काम न करे तो खुद से इलाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं क्योंकि हर कंधे का दर्द फ्रोजन शोल्डर ही हो, यह जरूरी नहीं है।

 

 

 

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