Breaking News

बरेली: बाइक हमारी, पेट्रोल हमारा… फिर मेहनत की कीमत कौन तय करेगा? पे-आउट बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे स्विग्गी राइडर्स।

बाइक हमारी, पेट्रोल हमारा… फिर मेहनत की कीमत कौन तय करेगा? पे-आउट बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे स्विग्गी राइडर्स।

संवाददाता मोहम्मद वसीम

बरेली। बरेली शहरभर में लोगों तक समय पर खाना पहुंचाने वाले स्विग्गी राइडर्स रविवार को अपनी रोजी-रोटी के सवाल को लेकर सड़क पर उतर आए। सील चौराहा पर जुटे राइडर्स ने कंपनी की पे-आउट नीति के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और कहा कि बढ़ती महंगाई और घटती कमाई के बीच अब काम करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।

राइडर्स का कहना है कि डिलीवरी के लिए इस्तेमाल होने वाली बाइक, पेट्रोल, सर्विस, इंश्योरेंस और रखरखाव का पूरा खर्च उन्हें अपनी जेब से उठाना पड़ता है। इसके बावजूद, उन्हें प्रति ऑर्डर मिलने वाला भुगतान लगातार कम मिल रहा है। उनका कहना है कि पूरे दिन की कड़ी मेहनत के बाद भी उनकी आय इतनी नहीं बच पाती कि वे अपने परिवार का खर्च आसानी से चला सकें।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले छह महीनों से उनका पे-आउट बढ़ाने का केवल कोरा आश्वासन ही दिया जा रहा है। पिछली हड़ताल के दौरान भी कंपनी की तरफ से सात दिन के भीतर भुगतान बढ़ाने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक जमीन पर कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है।

राइडर्स ने कंपनी की कैंसिल ऑर्डर, मल्टी-ऑर्डर और इंसेंटिव नीति पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई बार ऑर्डर रद्द होने का पूरा आर्थिक नुकसान उन्हें ही उठाना पड़ता है, जबकि एक साथ कई ऑर्डर पूरे करने के बावजूद उन्हें अपेक्षा के अनुरूप भुगतान नहीं मिलता।

इस दौरान राइडर्स ने मांग की कि दूरी के आधार पर पारदर्शी पे-आउट तय किया जाए, इंसेंटिव व्यवस्था में सुधार हो, कैंसिल ऑर्डर नीति में बदलाव किया जाए और मल्टी-ऑर्डर सिस्टम की पूरी समीक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह विरोध किसी कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल अपनी मेहनत का उचित और न्यायसंगत मूल्य पाने के लिए है। राइडर्स ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो उनके इस आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा।

 

 

Spread the love

Check Also

सहसवान: लंबे समय तक पेट की परेशानी को न करें नजरअंदाज, हो सकती है क्रॉनिक कोलाइटिस: डॉ. अमोल गुप्ता।

लंबे समय तक पेट की परेशानी को न करें नजरअंदाज, हो सकती है क्रॉनिक कोलाइटिस: …