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केसर चीनी मिल बंद हुई तो किसानों के सामने खड़ा होगा गन्ना खपाने का संकट।

भाकियू टिकैत के प्रदेश उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मिल चालू रखने और बकाया भुगतान की मांग उठाई।

संवाददाता: मोहम्मद वसीम

बहेड़ी, बरेली। केसर चीनी मिल बंद होने की आशंका से क्षेत्र के गन्ना किसानों की चिंता बढ़ गई है। मिल बंद होने पर किसानों के सामने गन्ने की बिक्री और उसे दूसरी चीनी मिलों तक पहुंचाने का संकट खड़ा हो सकता है। इस समस्या को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी जगत सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर केसर चीनी मिल को चालू रखने और किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराने की मांग की है।

चौधरी जगत सिंह ने पत्र में कहा कि केसर चीनी मिल क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए उपज बेचने का प्रमुख माध्यम है। यदि मिल बंद होती है तो किसानों को दूसरी चीनी मिलों पर निर्भर होना पड़ेगा। इससे गन्ने की ढुलाई का खर्च बढ़ने के साथ पर्ची और तौल की व्यवस्था को लेकर भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने आशंका जताई कि गन्ना बिक्री में दिक्कतों और भुगतान में देरी का असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में किसान गन्ने की खेती से दूरी बनाने पर मजबूर हो सकते हैं, जिससे क्षेत्र में गन्ने की खेती का रकबा भी प्रभावित होने की आशंका है।

भाकियू टिकैत के प्रदेश उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से मिल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के साथ वार्ता कर चीनी मिल को चालू रखने का रास्ता निकालने की अपील की। साथ ही किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग उठाई।

चौधरी जगत सिंह ने कहा कि चीनी मिल बंद होने का असर केवल गन्ना किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था और गन्ने की खेती से जुड़े लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए मिल को चालू रखना और बकाया भुगतान कराना जरूरी है।

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