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रामलीला में विश्वामित्र आगमन से सीता स्वयंवर तक का भावपूर्ण मंचन।

रामलीला में विश्वामित्र आगमन से सीता स्वयंवर तक का भावपूर्ण मंचन।

आई एम खान 

बिसौली। आदर्श रामलीला कमेटी दिसौलीगंज के रंगमंच पर रामायण के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को भक्ति और आस्था से सराबोर कर दिया। विश्वामित्र आगमन, अहिल्या उद्धार, ताड़का वध, सीता स्वयंवर, धनुष भंग और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन आकर्षण का केंद्र रहा।

मंचन के दौरान दिखाया गया कि महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में पहुंचकर अपने यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को साथ ले जाने का आग्रह करते हैं। पुत्रों के वियोग की आशंका से व्याकुल राजा दशरथ उन्हें भेजने में संकोच करते हैं, लेकिन महर्षि वशिष्ठ के समझाने पर दोनों राजकुमारों को विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं।

राजा दशरथ की भूमिका दीनदयाल भारती और महर्षि वशिष्ठ की भूमिका धनपाल फौजी ने निभाई। गुरु विश्वामित्र के रूप में पप्पू शर्मा तथा श्रीराम की भूमिका में अरविंद तिवारी ने शानदार अभिनय किया। मार्ग में श्रीराम अहिल्या का उद्धार करते हैं और इसके बाद मारीच तथा सुबाहु का वध कर महर्षि के यज्ञ की रक्षा करते हैं। लक्ष्मण की भूमिका अनुज कुमार ने निभाई।

इसके बाद जनकपुर में राजा जनक की प्रतिज्ञा के अनुसार सीता स्वयंवर का आयोजन दिखाया गया। स्वयंवर में उपस्थित अनेक राजा शिव धनुष उठाने में असफल रहते हैं। अंत में श्रीराम शिव धनुष भंग कर देते हैं, जिसके बाद माता सीता उनके गले में जयमाला डालती हैं। इस दृश्य के दौरान पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।

रावण की भूमिका में संजीव कुमार और बाणासुर की भूमिका में ब्रह्मपाल सिंह ने प्रभावशाली अभिनय किया। वहीं, परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। रामलीला के मंचन ने श्रद्धालुओं को रामायण के आदर्शों और धार्मिक प्रसंगों से जोड़ने का काम किया।

 

 

 

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