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शाहजहांपुर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर साइबर ठगों ने रिटायर्ड जीएम से ऐंठे 22 लाख, पुलिस ने 10.88 लाख कराए होल्ड।

शाहजहांपुर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर साइबर ठगों ने रिटायर्ड जीएम से ऐंठे 22 लाख, पुलिस ने 10.88 लाख कराए होल्ड।

संवाददाता, मुबारक अली 

शाहजहांपुर। जिले में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां शातिर ठगों ने कानून और गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर चीनी मिल के एक सेवानिवृत्त जनरल मैनेजर (जीएम) से 22 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने पीड़ित को व्हाट्सएप कॉल कर आतंकी कनेक्शन का डर दिखाया और झांसे में लेकर रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली। हालांकि, पीड़ित की शिकायत के बाद हरकत में आई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगों के खातों में जमा करीब 10.88 लाख रुपये होल्ड (फ्रीज) करा दिए हैं।

व्हाट्सएप कॉल से बिछाया डर का जाल

जानकारी के अनुसार, सीतापुर की किसान चीनी मिल से सेवानिवृत्त जीएम सुरेंद्र कुमार सक्सेना के पास गत 17 सितंबर को एक अनजान व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि पीड़ित के पहचान पत्र (आईडी) का इस्तेमाल कर केनरा बैंक में एक फर्जी खाता खोला गया है, जिसका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन में हो रहा है। इसके बाद गिरफ्तारी वारंट की धमकी देकर बुजुर्ग अधिकारी पर मानसिक दबाव बनाया गया।

तीन खातों से उड़ाई भारी-भरकम रकम

कथित जांच और कानूनी प्रक्रिया से बचाने के नाम पर ठगों ने पीड़ित से उनके बैंक खातों का विवरण हासिल कर लिया। इसके बाद 19 सितंबर को उनके एसबीआई (चौक शाखा) के खाते से 12 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। इसके दो दिन बाद फिर से दबाव बनाकर एसबीआई के दूसरे खाते से 6.50 लाख रुपये और आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक खाते से 3.50 लाख रुपये अलग-अलग खातों में भिजवा लिए गए।

ठगी का अहसास होते ही पहुंचे थाने

जब पीड़ित को अपने साथ हुई धोखाधड़ी की सच्चाई का अहसास हुआ, तो उन्होंने तत्काल साइबर क्राइम थाने में तहरीर दी। मामला दर्ज कर पुलिस जांच में जुट गई है। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर रजनीश कुमार के नेतृत्व में पुलिस की टीम संदिग्ध खातों की ट्रैकिंग कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बाकी रकम को रिकवर करने और गिरोह के सदस्यों तक पहुंचने के लिए कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस की अपील: डरें नहीं, तुरंत 1930 पर दें सूचना

साइबर सेल ने आम नागरिकों को सतर्क करते हुए अपील की है कि फोन या व्हाट्सएप पर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताने वाले किसी भी व्यक्ति के दबाव में न आएं। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे ट्रांसफर करने या डिजिटल अरेस्ट की धमकी नहीं देती। यदि कोई संदिग्ध कॉल आए तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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