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162 करोड़ के बकाये पर केसर मिल को सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग, मुख्यमंत्री तक पहुंचा किसानों का दर्द।

भाकियू टिकैत ने लखनऊ में सौंपा ज्ञापन, मिल को ऋण देकर दोबारा चालू कराने और किसानों का भुगतान कराने की उठाई मांग।

संवाददाता, मोहम्मद वसीम 

बहेड़ी (बरेली)। केसर चीनी मिल का बंद होना अब केवल गन्ना किसानों के भुगतान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे क्षेत्र के रोजगार और कारोबार पर भी संकट गहराने लगा है। मिल पर किसानों का करीब 162 करोड़ रुपये बकाया बताया जा रहा है। मिल का संचालन ठप होने से परेशान किसानों की आवाज भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाई है। संगठन ने मिल को आर्थिक सहायता देकर दोबारा शुरू कराने और जरूरत पड़ने पर सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग उठाई है।

भाकियू टिकैत के पदाधिकारियों ने 30 अक्टूबर को लखनऊ में मुख्यमंत्री एवं प्रमुख सचिव, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग को ज्ञापन सौंपकर किसानों की समस्याओं से अवगत कराया। किसान नेताओं ने कहा कि गन्ने का भुगतान लंबे समय से अटका होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। खेती के लिए लिया गया कर्ज चुकाना मुश्किल हो रहा है। खाद-बीज की खरीद, घरेलू खर्च और अगली फसल की तैयारी पर भी इसका असर पड़ रहा है।

किसान नेताओं ने ज्ञापन में बताया कि केसर चीनी मिल बंद होने का असर सिर्फ गन्ना किसानों पर ही नहीं, बल्कि सैकड़ों स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के रोजगार पर भी पड़ा है। मिल से जुड़े मजदूरों, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और स्थानीय व्यापारियों की आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। यदि जल्द मिल का संचालन बहाल नहीं हुआ तो क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका असर और गहरा हो सकता है।

गन्ना आवंटन में कटौती और पावर प्लांट पर उठाए सवाल

भाकियू ने मिल को गन्ना आवंटन में कथित तौर पर लगातार की गई कटौती और पावर प्लांट पर करोड़ों रुपये के निवेश के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। किसान नेताओं का कहना है कि इन परिस्थितियों ने मिल की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया, जिसका खामियाजा किसानों और कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।

सरकार से मिल को दोबारा शुरू कराने की मांग

संगठन ने सरकार से मांग की कि मिल प्रबंधन पर दबाव बनाकर किसानों का बकाया भुगतान कराया जाए। मिल को आवश्यक ऋण उपलब्ध कराकर दोबारा संचालन शुरू कराया जाए। यदि जरूरत पड़े तो इसे सरकारी नियंत्रण में लेकर चलाने की संभावनाओं पर भी निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही मिल की बिक्री और संचालन से जुड़ी परिस्थितियों की समीक्षा कर किसानों के हितों को सुरक्षित किया जाए।

संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, अधिकारियों ने मिल को ऋण उपलब्ध कराने अथवा सरकारी नियंत्रण में लेकर दोबारा शुरू कराने की संभावनाओं पर विचार करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, किसानों के सामने अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि 162 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान कब होगा और बंद पड़ी मिल के पहिए दोबारा कब घूमेंगे।

ज्ञापन सौंपने वालों में भाकियू टिकैत के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी जगत सिंह, जिला महासचिव यामीन मलिक, प्रदेश सचिव दानिश बाबा, संगठन जिला मंत्री विजयपाल सिंह और युवा प्रदेश संगठन मंत्री फरहान बादशाह शामिल रहे।

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