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बहेड़ी: निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर की रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल, ऑपरेशन के दौरान नवजात के घायल पैदा होने का आरोप; एसडीएम से निष्पक्ष जांच की मांग।

बहेड़ी: निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर की रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल, ऑपरेशन के दौरान नवजात के घायल पैदा होने का आरोप; एसडीएम से निष्पक्ष जांच की मांग।

संवाददाता, मोहम्मद वसीम

बहेड़ी (बरेली)। स्थानीय क्षेत्र में एक निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गर्भवती महिला के परिजनों ने आरोप लगाया है कि सेंटर की ओर से कथित तौर पर गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दी गई, जिसके चलते समय रहते सही चिकित्सकीय स्थिति का पता नहीं चल सका। परिजनों का आरोप है कि इसी लापरवाही के कारण जब ऑपरेशन कराया गया, तो नवजात शिशु घायल अवस्था में पैदा हुआ। इस मामले को लेकर उपजिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम मंडनपुर जनूबी निवासी पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी पत्नी का पहला अल्ट्रासाउंड 18 फरवरी 2026 को बहेड़ी के ही एक निजी सेंटर पर कराया गया था। आरोप है कि उस रिपोर्ट में गर्भ की अवधि वास्तविक स्थिति से काफी कम दर्ज की गई थी। इसके बाद जब 4 मई 2026 को दोबारा जांच कराई गई, तब भी गर्भावस्था लगभग 25 सप्ताह की दर्शाई गई और रिपोर्ट में किसी भी तरह की गंभीर चिकित्सकीय जटिलता का जिक्र नहीं किया गया।

परिजनों के मुताबिक, कुछ समय बीतने के बाद अचानक महिला की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा। आरोप है कि जब डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया, तो नवजात शिशु की पीठ पर गहरा घाव और सिर में सूजन पाई गई। बाद में जब यह मामला दूसरे चिकित्सकों के सामने आया, तो उन्होंने पहले कराई गई अल्ट्रासाउंड रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए उनमें बड़ी त्रुटियों की आशंका जताई।

मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़ित शिकायतकर्ता बीते 25 जुलाई को इस सिलसिले में स्पष्टीकरण मांगने के लिए संबंधित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जा पहुंचा। उसका आरोप है कि वहां मौजूद कर्मचारियों ने उसकी बात सुनने के बजाय उसके साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी देकर सेंटर से भगा दिया।

यह पूरा प्रकरण अब केवल एक पीड़ित परिवार की निजी शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों की कार्यप्रणाली, उनकी रिपोर्टों की गुणवत्ता और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी बड़े सवालिया निशान लग गए हैं। यदि प्रशासनिक जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सीधे तौर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद गंभीर लापरवाही का मामला माना जाएगा।

शिकायतकर्ता ने उपजिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे मामले की विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम से निष्पक्ष जांच कराई जाए, सभी संबंधित अल्ट्रासाउंड रिपोर्टों का तकनीकी परीक्षण हो और दोषी पाए जाने वाले सेंटर तथा कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

प्रशासनिक स्तर पर शिकायत मिलने की पुष्टि कर दी गई है और अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अब सबकी निगाहें इस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या वाकई अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में चिकित्सकीय त्रुटि थी या नहीं, और यदि थी तो इसके लिए किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

बाइट- नईम खान पीड़ित पिता

 

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