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सहसवान: बैनामे की जमीन पर नामांतरण का आरोप, कोर्ट के आदेश पर चार के खिलाफ मुकदमा।

बैनामे की जमीन पर नामांतरण का आरोप, कोर्ट के आदेश पर चार के खिलाफ मुकदमा।

प्रधान संपादक, रवि कुमार शाक्य 

सहसवान (बदायूं)। बैनामे के बाद जमीन के राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से नाम दर्ज कराने, कूट रचना, धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में न्यायालय के आदेश पर सहसवान पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों में एक महिला, उसके दो पुत्र और संबंधित हल्का लेखपाल शामिल हैं।

मामला ग्राम फतनपुर टप्पा हवेली (अंदर चुंगी), परगना एवं तहसील सहसवान से संबंधित है। अलीगढ़ जनपद के ग्राम कुंजलपुर निवासी नाहर सिंह ने मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बदायूं की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर कार्रवाई की मांग की थी। न्यायालय ने 21 सितंबर 2026 को प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए सहसवान पुलिस को संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना के निर्देश दिए।

नाहर सिंह के अनुसार उसने 28 जनवरी 2006 को ग्राम फतनपुर टप्पा हवेली स्थित खसरा संख्या 363, 364, 371 और 372 की भूमि का बैनामा ईश्वरसरन पुत्र रामनाथ से कराया था। शिकायत में बताया गया कि बैनामे के समय ईश्वरसरन के पुत्र गौरव मिश्रा गवाह के तौर पर मौजूद थे।

आरोप है कि ईश्वरसरन की वर्ष 2017 में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी उर्मिला देवी और पुत्र गौरव मिश्रा व सौरभ मिश्रा ने कथित तौर पर उक्त भूमि के राजस्व अभिलेखों में अपने नाम दर्ज करा लिए। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसे इसकी जानकारी 13 मार्च 2026 को हुई। इसके बाद संबंधित लोगों से जमीन के संबंध में बातचीत करने पर कथित रूप से गाली-गलौज और धमकी दी गई।

शिकायत में गौरव मिश्रा और सौरभ मिश्रा पर हथियार दिखाकर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। नाहर सिंह का कहना है कि उसने थाना पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बदायूं को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण ली।

न्यायालय के निर्देश के बाद सहसवान पुलिस ने उर्मिला देवी पत्नी स्वर्गीय ईश्वरसरन, गौरव मिश्रा व सौरभ मिश्रा पुत्रगण स्वर्गीय ईश्वरसरन तथा संबंधित हल्का लेखपाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 352 और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

 

 

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