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अलापुर नगर पंचायत में विकास बैठक न होने पर भड़के जन-प्रतिनिधि, कार्यालय में किया तीखा प्रदर्शन।

चेयरमैन की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल, सरकारी दस्तावेजों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप।

संवाददाता, शैलेन्द्र सिंह

अलापुर, बदायूं। नगर पंचायत अलापुर में विकास कार्यों के ठप होने और महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक न हो पाने के कारण सभासदों का धैर्य जवाब दे गया। क्षेत्र के समस्त सभासदों ने एकजुट होकर नगर पंचायत कार्यालय में जोरदार हंगामा किया और अध्यक्षा की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

जन-प्रतिनिधियों का कहना है कि नगर पंचायत में चल रही तानाशाही के कारण क्षेत्र का विकास पूरी तरह से रुक गया है और आम जनता पानी, सड़क, नाली तथा बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है। सभासदों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर गंभीर गबन और अनियमितताओं की शिकायतें सिद्ध होने के बावजूद अब तक कोई सख्त कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है, जिससे कार्यालय की साख धूमिल हो रही है।

मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए सभासदों ने बताया कि 18 अप्रैल को वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट, सड़क व नाली निर्माण तथा मार्ग प्रकाश व्यवस्था जैसे जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए बोर्ड बैठक बुलाई गई थी। सभी वार्डों के सभासद अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और विकास प्रस्तावों को लेकर समय पर बैठक में भाग लेने पहुंचे थे। परंतु नगर पंचायत अध्यक्षा स्वयं इस महत्वपूर्ण बैठक से नदारद रहीं, जिसके चलते बैठक संपन्न नहीं हो सकी।

आरोप है कि प्रस्ताव रजिस्टर पर पहले से ही मनमाने तरीके से प्रस्ताव लिख दिए गए थे और जब वहां मौजूद बाबू गार्गी गुप्ता से इस संबंध में बात की गई, तो उन्होंने सभासदों से केवल रजिस्टर पर दस्तखत करके चले जाने को कह दिया। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से नाराज होकर सभासदों ने कार्यालय में ही चेयरमैन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया।

हंगामे के दौरान सभासदों ने ‘चेयरमैन पति’ पर भी नगर पंचायत के कार्यों में अवैध रूप से हस्तक्षेप करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नियमों को ताक पर रखकर कार्यालय के अत्यंत महत्वपूर्ण और गोपनीय सरकारी दस्तावेज व रजिस्टर आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे साजिद नाम के एक युवक को सौंप दिए गए हैं। नियमानुसार सरकारी अभिलेखों का काम केवल स्थायी सरकारी कर्मचारी ही कर सकता है, लेकिन यहाँ सरकारी कर्मियों से उनके अधिकार छीनकर निजी हाथों में दे दिए गए हैं।

सभासदों ने सवाल उठाया कि जब कार्यालय का सारा काम साजिद नाम का बाहरी व्यक्ति ही देख रहा है, तो फिर वहां तैनात बाबू और अन्य कर्मचारियों की क्या आवश्यकता है। अंत में सभी नाराज सभासदों ने मांग की कि अध्यक्षा की उपस्थिति में पारदर्शी तरीके से दोबारा बोर्ड बैठक आयोजित की जाए, ताकि रुके हुए विकास कार्यों पर सही निर्णय लिया जा सके।

 

 

 

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