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स्वास्थ्य जागरूकता: सही पहचान, फ्लूइड मैनेजमेंट और समय पर इलाज से संभव है डेंगू से बचाव : डॉ. आदित्य गुप्ता

स्वास्थ्य जागरूकता: सही पहचान, फ्लूइड मैनेजमेंट और समय पर इलाज से संभव है डेंगू से बचाव : डॉ. आदित्य गुप्ता

प्रधान संपादक, रवि कुमार शाक्य 

सहसवान (बदायूं)। मानसून और उसके बाद के मौसम में डेंगू का प्रकोप एक प्रमुख जनस्वास्थ्य समस्या बन जाता है। यह बीमारी संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलती है, जो मुख्य रूप से दिन में काटता है और घरों के आसपास जमा साफ पानी में पनपता है। डेंगू वार्ड इंचार्ज (हिंदू राव अस्पताल, दिल्ली) रह चुके डॉ. रामनिवास गुप्ता अस्पताल, सहसवान के विशेषज्ञ डॉ. आदित्य गुप्ता ने डेंगू के लक्षण, सही उपचार और सावधानियों को लेकर महत्वपूर्ण चिकित्सकीय परामर्श साझा किए हैं।

अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी, जी मिचलाना-उल्टी और त्वचा पर लाल चकत्ते इसके सामान्य लक्षण हैं। हालांकि, हर मरीज में सभी लक्षण दिखना आवश्यक नहीं है। डॉ. गुप्ता के अनुसार, डेंगू में अक्सर लोग केवल प्लेटलेट काउंट को लेकर चिंतित हो जाते हैं, जबकि केवल प्लेटलेट काउंट बीमारी की गंभीरता का एकमात्र पैमाना नहीं है। मरीज का ब्लड प्रेशर, पल्स रेट, हेमेटोक्रिट, पेशाब की मात्रा और शरीर में ब्लीडिंग के लक्षणों का आकलन ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए सिर्फ प्लेटलेट रिपोर्ट देखकर घबराने के बजाय डॉक्टर की देखरेख में रहना जरूरी है।

बुखार कम होने के दौरान या उसके तुरंत बाद कुछ मरीजों में स्थिति गंभीर हो सकती है। पेट में लगातार तेज दर्द, बार-बार उल्टी होना, नाक या मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी या काला मल आना, अत्यधिक सुस्ती, चक्कर आना, त्वचा का ठंडा व चिपचिपा होना या पेशाब की मात्रा में अचानक कमी आना जैसी चेतावनियां मिलने पर बिना देरी किए मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।

डेंगू की कोई विशिष्ट एंटीवार्न दवा नहीं होती, इसका इलाज मुख्यतः सपोर्टिव केयर और फ्लूइड मैनेजमेंट पर आधारित है। बिना वार्निंग साइंस वाले हल्के मरीजों को पर्याप्त आराम, ओआरएस और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है। बुखार के लिए केवल डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामोल लें, जबकि एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन और डाइक्लोफेनाक जैसी दवाओं से सख्त परहेज करें क्योंकि ये ब्लीडिंग का खतरा बढ़ा सकती हैं। गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कर मरीज के वजन और क्लिनिकल स्थिति के अनुसार आईवी फ्लूइड्स दिए जाते हैं। केवल प्लेटलेट घट जाने पर हर मरीज को प्लेटलेट चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती; यह निर्णय ब्लीडिंग और मरीज की समग्र स्थिति पर निर्भर करता है। आपात स्थिति के लिए डॉ. रामनिवास गुप्ता अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा भी उपलब्ध है।

बचाव के लिए हर सप्ताह कूलर, गमले, टंकियों और पुराने बर्तनों में जमा पानी को साफ करें। पानी के बर्तनों को हमेशा ढककर रखें, पूरी बांह के कपड़े पहनें और मच्छररोधी क्रीम का इस्तेमाल करें। डॉ. आदित्य गुप्ता ने अपील की है कि डेंगू से घबराने के बजाय सही समय पर पहचान, डॉक्टर की निगरानी और उचित तरल प्रबंधन अपनाकर मरीज की जान बचाई जा सकती है।

 

 

 

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