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बरेली: दादा एवं पूर्व चेयरमैन स्व. जमील अहमद की तालीमी विरासत को पोते ने दी नई उड़ान, मोहम्मद रुशान ने 98.6% अंक लाकर स्कूल में किया टॉप।

रेली: दादा एवं पूर्व चेयरमैन स्व. जमील अहमद की तालीमी विरासत को पोते ने दी नई उड़ान, मोहम्मद रुशान ने 98.6% अंक लाकर स्कूल में किया टॉप।

संवाददाता, मोहम्मद वसीम 

बहेड़ी/प्रयागराज: शिक्षा की लौ कैसे पीढ़ियों तक रोशन रहती है, इसकी एक बेहतरीन मिसाल बहेड़ी के एक प्रतिष्ठित परिवार से सामने आई है। बहेड़ी के जाने-माने शिक्षाविद और नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन स्वर्गीय हाजी जमील अहमद की तालीमी और वैचारिक विरासत को उनके पोते मोहम्मद रुशान ने एक नई बुलंदी दी है। सीबीएसई बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में 98.6 प्रतिशत शानदार अंक हासिल कर रुशान ने न केवल प्रयागराज के टीपीएस स्कूल में टॉप किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

रुशान की इस असाधारण कामयाबी ने बहेड़ी से लेकर प्रयागराज तक पूरे परिवार और शुभचिंतकों को गौरवान्वित कर दिया है। इस सफलता की सबसे खास बात यह रही कि रुशान ने इसके लिए किसी भी तरह की कोचिंग या प्राइवेट ट्यूशन का सहारा नहीं लिया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी अनुशासित दिनचर्या, स्व-अध्ययन (सेल्फ स्टडी) और माता-पिता के लगातार मार्गदर्शन को दिया है।

टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान रुशान ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी इस सफलता के असली हकदार उनके माता-पिता हैं, जिन्होंने हर मुश्किल मोड़ पर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने अपने दिवंगत दादा-दादी, नाना और मामू को याद करते हुए कहा कि यदि आज वे इस दुनिया में होते, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता। रुशान ने अपने दिवंगत परिजनों की मग़फ़िरत (आत्मा की शांति) के लिए दुआ की।

रुशान के पिता और इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता शकील मकरानी ने गर्व महसूस करते हुए बताया कि उनके والد (पिता) स्वर्गीय हाजी जमील अहमद अक्सर कहा करते थे कि “इंसान की सबसे बड़ी पूंजी तालीम (शिक्षा) और बेहतर अख़लाक़ है।” उनका पक्का विश्वास था कि शिक्षा ही आने वाली पीढ़ियों की सबसे मजबूत विरासत है। रुशान की यह कामयाबी उन्हीं संस्कारों और सीख का परिणाम है।

मोहम्मद रुशान ने साझा किया कि वह अपने दादाजी को बेहद प्यार से “टाइगर” कहकर पुकारते थे। उनके व्यक्तित्व का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। समाज में उनके दादा के मान-सम्मान और उनकी दूरदर्शी सोच ने हमेशा उन्हें बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। रुशान का कहना है कि वह भविष्य में भी पूरी लगन के साथ अपने परिवार की इस शैक्षणिक परंपरा और मूल्यों को आगे बढ़ाएंगे।

रुशान की इस चमकदार सफलता पर शिक्षाविदों, वकीलों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े तमाम गणमान्य लोगों ने उन्हें और उनके परिवार को बधाई दी है। लोगों का कहना है कि यह सफलता सिर्फ एक छात्र की व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उस अनुशासन और मेहनत की परंपरा की जीत है जिसकी नींव स्वर्गीय हाजी जमील अहमद ने रखी थी। रुशान ने यह साबित कर दिखाया है कि पक्के इरादे और सही मार्गदर्शन के बिना भी केवल स्व-अध्ययन से ऊंचे मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।

 

 

 

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