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बरेली: करोड़ों की जमीन पर कब्जे का आरोप: प्रेस वार्ता में महिला ने पुलिस और भूमाफिया पर उठाए गंभीर सवाल।

करोड़ों की जमीन पर कब्जे का आरोप: प्रेस वार्ता में महिला ने पुलिस और भूमाफिया पर उठाए गंभीर सवाल।

संवाददाता, मोहम्मद वसीम 

बरेली। शहर में करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को लेकर उपजा विवाद शनिवार को एक नए मोड़ पर पहुंच गया। प्रेमनगर निवासी अनीता मौर्य ने एक प्रेस वार्ता के दौरान आरोप लगाया कि इज्जतनगर क्षेत्र स्थित उनकी पैतृक संपत्ति पर अवैध कब्जा करने के लिए एक संगठित गिरोह द्वारा दबाव बनाया जा रहा है, और इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय पुलिस की भूमिका भी बेहद संदग्धि रही है।

बीमार बुजुर्ग से जबरन हस्ताक्षर कराने का आरोप

प्रेस वार्ता में अनीता मौर्य ने दावा किया कि उनके नंदोई दाताराम मौर्य गंभीर रूप से बीमार हैं और उनकी जमीन का मामला पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है। आरोप है कि 18 जुलाई को कुछ लोग उन्हें बैंक से कथित तौर पर जबरन वाहन में बैठाकर ले गए, उन्हें धमकाया और कई कागजातों पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। इसके बाद रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन का हस्तांतरण कराने का प्रयास किया गया, लेकिन परिजनों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस और निबंधक कार्यालय में दिए गए प्रार्थना पत्र के कारण वह रजिस्ट्री रुक गई।

पुलिस पर दबाव बनाने और युवक को जेल भेजने का गंभीर आरोप

महिला का आरोप है कि रजिस्ट्री रुकने के बाद मामला और तूल पकड़ गया। उनके मुताबिक, अगले दिन कुछ पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और परिवार को गंभीर मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। बाद में उन्हें कोतवाली बुलाकर सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए और कथित तौर पर यह शर्त रखी गई कि “पहले जमीन की रजिस्ट्री कराओ, तभी बेटे को छोड़ा जाएगा।” अनीता का कहना है कि जब उन्होंने रजिस्ट्री करने से इनकार कर दिया, तो उनके भांजे रजत मौर्य को तीन दिनों तक थाने में अवैध रूप से बैठाए रखा गया और बाद में एक मुकदमे में नामजद कर जेल भेज दिया गया।

उन्होंने सुनित अग्रवाल, हरीश और अन्य लोगों पर लगातार धमकियां देने तथा प्रभाव का इस्तेमाल कर जमीन अपने नाम कराने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पुलिस ने सभी आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि इस मामले में पूर्व में ही नियमानुसार विधिक कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और नामजद आरोपी को जेल भेजा गया है। पुलिस का पक्ष है कि की गई समस्त कार्रवाई पूरी तरह से साक्ष्यों और विधिक प्रावधानों पर आधारित है, तथा परिजनों द्वारा लगाए गए तमाम आरोप तथ्यहीन एवं भ्रामक हैं।

फिलहाल यह पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है, और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले की स्वतंत्र जांच करवाता है या यह विवाद अदालत और पुलिस के बीच एक लंबी कानूनी जंग का रूप लेता है।

 

 

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