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बरेली: तहसील दिवस में गूंजा 161 करोड़ के गन्ना भुगतान का मुद्दा: किसानों ने पूछे तीखे सवाल, 25 में से सिर्फ 4 शिकायतों का निस्तारण।

तहसील दिवस में गूंजा 161 करोड़ के गन्ना भुगतान का मुद्दा: किसानों ने पूछे तीखे सवाल, 25 में से सिर्फ 4 शिकायतों का निस्तारण।

संवाददाता, मोहम्मद वसीम 

बरेली। बहेड़ी तहसील सभागार में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस इस बार सामान्य प्रशासनिक बैठकों से हटकर किसानों के आक्रोश और पीड़ा का केंद्र बन गया। विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याओं के बीच सबसे प्रमुख और मुखर आवाज चीनी मिल पर बकाया गन्ना मूल्य भुगतान की रही। किसानों ने करीब 161 करोड़ रुपये के लंबित भुगतान का कड़ा मुद्दा उठाते हुए प्रशासन से स्पष्ट और निश्चित समयसीमा की मांग की।

किसानों का दर्द: “मेहनत की कमाई का पैसा कब मिलेगा?”

किसानों ने अधिकारियों के सामने अपनी व्यथा रखते हुए कहा कि महीनों से भुगतान अटका होने के कारण उनकी खेती-किसानी की आगामी तैयारियां पूरी तरह प्रभावित हो रही हैं। खाद, बीज और सिंचाई का खर्च जुटाना मुश्किल होता जा रहा है, और परिवारों की बुनियादी जरूरतें भी संकट में पड़ गई हैं। कई फरियादों ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्होंने अपना गन्ना तो मिल को सौंप दिया, लेकिन खून-पसीने की मेहनत का भुगतान अब तक उनके खातों तक नहीं पहुंचा है।

एसडीएम गोपाल शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस संपूर्ण समाधान दिवस में विभिन्न विभागों से कुल 25 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से मात्र 4 शिकायतों का ही मौके पर त्वरित निस्तारण किया जा सका, जबकि शेष 21 मामलों को आगामी जांच और समयबद्ध कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को सौंप दिया गया। हालांकि शिकायतों का दायरा राजस्व अभिलेखों की त्रुटियों, विद्युत आपूर्ति और विकास कार्यों तक फैला था, लेकिन पूरे आयोजन पर गन्ना भुगतान का मुद्दा ही पूरी तरह हावी रहा।

एसडीएम गोपाल शर्मा ने सभी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्राप्त शिकायतों का निष्पक्ष, गुणवत्तापूर्ण और तय समयसीमा के भीतर निस्तारण किया जाए, ताकि फरियादियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसानों की समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

हालांकि, प्रशासनिक आश्वासनों के बावजूद तहसील दिवस से बाहर निकलते समय किसानों के चेहरों पर राहत की जगह चिंता और लंबा इंतजार साफ झलक रहा था। अब अन्नदाताओं की निगाहें पूरी तरह इस बात पर टिकी हैं कि 161 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम बकाये के भुगतान को लेकर प्रशासन की ओर से वास्तविक और ठोस जमीन पर कार्रवाई कब शुरू होती है। इस बैठक के दौरान तहसीलदार भानू प्रताप सिंह सहित विभिन्न विभागों के तमाम प्रमुख अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

 

 

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