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शाहजहांपुर: आयुर्वेद के अनुसार माँ का दूध शिशु के लिए अमृत, सही स्तनपान तकनीक अपनाने का आह्वान।

आयुर्वेद के अनुसार माँ का दूध शिशु के लिए अमृत, सही स्तनपान तकनीक अपनाने का आह्वान।

मुबारक अली, संवाददाता

शाहजहाँपुर: विश्व स्तनपान सप्ताह के समापन अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन द्वारा एक जनजागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महासम्मेलन के जिला अध्यक्ष डॉ. विजय जौहरी ने की। इस गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार करने के साथ-साथ आयुर्वेदिक जीवनशैली और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देना था।

मुख्य वक्ता डॉ. सुमन अग्रवाल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आयुर्वेद में माँ का दूध शिशु के लिए अमृत के समान माना गया है। यह शिशु को संपूर्ण पोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता, ओज, बल तथा स्वस्थ शारीरिक एवं मानसिक विकास प्रदान करता है। उन्होंने माताओं को सलाह दी कि प्रत्येक बार शिशु को पहले एक ही स्तन से लगभग 15 से 20 मिनट तक दूध पिलाना चाहिए, ताकि उसे प्रारंभिक दूध के साथ-साथ अंत में मिलने वाला वसा और ऊर्जा से भरपूर दूध भी पर्याप्त मात्रा में प्राप्त हो सके।

कार्यक्रम में डॉ. सुमन अग्रवाल, डॉ. रचना रस्तोगी, डॉ. पल्लवी सक्सेना, डॉ. आंचल गुप्ता और डॉ. सुविया ने सफल स्तनपान से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सफल स्तनपान के लिए शिशु का स्तन से सही लगाव होना बहुत जरूरी है। इसके सही लक्षणों में शिशु की ठोड़ी का स्तन से सटा होना, उसका मुंह पर्याप्त रूप से खुला होना, निप्पल के नीचे का हिस्सा कम और ऊपर का भाग अधिक दिखाई देना, तथा शिशु का धीरे-धीरे गहरे घूंट लेकर दूध पीना शामिल है। यह इस बात का संकेत है कि शिशु सही ढंग से और पर्याप्त मात्रा में दूध प्राप्त कर रहा है।

चिकित्सकों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध नवजात शिशु के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है, इसलिए इसे कभी नहीं फेंकना चाहिए। उन्होंने सभी माताओं से अपील की कि वे बच्चे को जन्म के बाद छह महीने तक केवल माँ का दूध ही पिलाएं और इसके बाद पूरक आहार के साथ-साथ कम से कम दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखें।

परिवार नियोजन के संबंध में जानकारी देते हुए चिकित्सकों ने बताया कि यदि जन्म के बाद पहले छह माह तक शिशु केवल स्तनपान कर रहा हो और माँ का मासिक धर्म वापस न आया हो, तो यह प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना को काफी हद तक कम कर देता है। हालांकि, आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर परिवार नियोजन के अन्य सुरक्षित साधन भी अपनाए जाने चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय संबोधन देते हुए डॉ. विजय जौहरी ने कहा कि अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन हमारी गौरवशाली आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के वैज्ञानिक सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने और समाज में स्वस्थ जीवनशैली को पुनर्स्थापित करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप महासम्मेलन आगे भी ऐसे जनहितैषी स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। गोष्ठी के अंत में सभी चिकित्सकों और उपस्थित गणमान्य लोगों ने सफल स्तनपान के संदेश को घर-घर तक पहुँचाने का सामूहिक संकल्प लिया।

 

 

 

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