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मिनी स्मार्ट सिटी सहसवान में विकास के दावों की खुली पोल, डार्लिंग रोड पर महीनों से जलभराव।

सड़क पर पानी, स्कूली बच्चों की राह में मुसीबत, प्रमोद संस्कृत महाविद्यालय का मैदान बना तालाब, राहगीर परेशान; हादसों का खतरा बरकरार, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

प्रधान संपादक, रवि कुमार शाक्य 

सहसवान (बदायूं)। मिनी स्मार्ट सिटी का दर्जा रखने वाले सहसवान नगर में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर देखना हो तो डार्लिंग रोड की स्थिति काफी कुछ बयां कर देती है। नगर के प्रमोद इंटर कॉलेज के पास एलआईसी मोड़ से डार्लिंग रोड पर करीब 100 मीटर तक सड़क की हालत बदहाल है। यहां पिछले कई महीनों से जलभराव की समस्या बनी हुई है। सड़क पर पानी जमा होने के कारण राहगीरों, वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद नगर पालिका परिषद की ओर से समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम दिखाई नहीं दे रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क पर लंबे समय से पानी भरा होने के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। पानी के नीचे सड़क की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पाता, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय स्तर पर बाइक सवारों के घायल होने और ई-रिक्शा पलटने की घटनाओं की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में यह जलभराव केवल असुविधा नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्या बन गया है।

स्कूली बच्चों की राह में बना जलभराव बाधा।

डार्लिंग रोड से प्रमोद संस्कृत महाविद्यालय और रानी लक्ष्मीबाई स्कूल आने-जाने वाले बच्चे भी गुजरते हैं। सुबह स्कूल जाते समय और छुट्टी के बाद घर लौटते समय बच्चों को इसी जलभराव से होकर निकलना पड़ता है। सड़क पर पानी भरा होने से बच्चों को काफी परेशानी होती है। अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। सवाल यह है कि जब स्कूली बच्चों के आवागमन का रास्ता ही सुरक्षित नहीं है तो जिम्मेदार विभाग इस समस्या को गंभीरता से क्यों नहीं ले रहा है?

जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उन्हें रोजाना रास्ते में जलभराव की समस्या से जूझना पड़ रहा है। बच्चों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन महीनों से बनी इस समस्या का समाधान न होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

प्रमोद संस्कृत महाविद्यालय का मैदान बना तालाब।

डार्लिंग रोड पर जलभराव का असर प्रमोद संस्कृत महाविद्यालय के मैदान पर भी दिखाई दे रहा है। मैदान में पानी जमा होने से तालाब जैसी स्थिति बन गई है। इसके चलते बच्चों के खेलकूद और अन्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। खेल का मैदान बच्चों के शारीरिक विकास और प्रतिभा निखारने का महत्वपूर्ण स्थान होता है, लेकिन पानी जमा होने के कारण इसका उपयोग करना मुश्किल हो गया है।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जल निकासी की उचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई योजना तैयार की गई है या फिर लोगों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा?

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की आवाजाही के बावजूद समस्या जस की तस।

इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी, अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की आवाजाही भी इसी मार्ग से होती है। उपजिलाधिकारी कार्यालय की ओर जाने वाले वाहनों को भी इस मार्ग की स्थिति का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद यदि कई महीनों से जलभराव की समस्या बनी हुई है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस ओर गंभीरता से ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है।

क्या संबंधित अधिकारियों ने कभी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया? क्या नगर पालिका परिषद को जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए? यदि कार्रवाई हुई है तो उसका असर सड़क पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा है? आम जनता की परेशानी सामने होने के बावजूद समाधान न होना जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।

मिनी स्मार्ट सिटी के दावों पर भारी पड़ रही बदहाल सड़क।

सहसवान को मिनी स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की बात कही जाती है। ऐसे में नगरवासियों की अपेक्षा है कि उन्हें बेहतर सड़कें, साफ-सफाई, सुचारु जल निकासी और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलें। लेकिन डार्लिंग रोड की मौजूदा स्थिति इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है।

स्मार्ट सिटी का मतलब केवल नाम और विकास के दावे नहीं, बल्कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यदि किसी प्रमुख मार्ग पर महीनों तक पानी जमा रहे, स्कूली बच्चे परेशान हों, खेल का मैदान तालाब बन जाए और वाहन चालकों की सुरक्षा पर खतरा बना रहे तो विकास के दावों की समीक्षा होना जरूरी है।

नगर पालिका से जनता के सवाल।

डार्लिंग रोड पर जलभराव की समस्या को लेकर नगर पालिका परिषद सहसवान के जिम्मेदारों से कई सवाल पूछे जा रहे हैं। आखिर महीनों से जमा पानी की निकासी का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया? नालों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए? स्कूली बच्चों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं? प्रमोद संस्कृत महाविद्यालय के मैदान से पानी निकालने की क्या योजना है? आखिर जिम्मेदार अधिकारी मौके पर निरीक्षण कर समस्या का समाधान कब कराएंगे?

नगर पालिका परिषद को तत्काल मौके का निरीक्षण कराकर जमा पानी की निकासी सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही नालों की सफाई कराकर भविष्य में जलभराव रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए। यदि जल निकासी व्यवस्था में कोई तकनीकी खामी है तो उसे दूर किया जाना चाहिए और यदि सफाई या रखरखाव में लापरवाही है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

नगरवासियों को उम्मीद है कि नगर पालिका परिषद के चेयरमैन और संबंधित अधिकारी इस समस्या का संज्ञान लेकर मौके पर पहुंचेंगे और जल्द राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर पालिका परिषद सहसवान डार्लिंग रोड को जलभराव से मुक्ति दिलाएगी या फिर मिनी स्मार्ट सिटी के विकास के दावे इसी तरह जमीनी समस्याओं के सामने कमजोर पड़ते रहेंगे? इस गंभीर समस्या पर जिलाधिकारी का ध्यान कब जाएगा और नगरवासियों को राहत कब मिलेगी, यह देखना बाकी है।

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