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उझानी में कवि सम्मेलन में बही कविता की रसधार, हास्य-व्यंग्य पर गूंजती रहीं तालियां।

उझानी में कवि सम्मेलन में बही कविता की रसधार, हास्य-व्यंग्य पर गूंजती रहीं तालियां।

उझानी (बदायूं)। श्री धर्मार्थ कामधेनु गौशाला के तत्वावधान में आयोजित श्री रामलीला महोत्सव के अंतर्गत रविवार शाम रामलीला मैदान में विराट कवि सम्मेलन हुआ। देर रात तक चले इस आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को कभी भावुक किया तो कभी हास्य-व्यंग्य से खूब गुदगुदाया।

कार्यक्रम के प्रायोजक समाजसेवी अरुण कुमार अग्रवाल तथा संयोजक डॉ. प्रभाकर मिश्र, पूर्व सभासद कमलेश वार्ष्णेय और कवि उमाशंकर राही ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। मथुरा से आईं कवयित्री रेणु उपाध्याय की सरस्वती वंदना से काव्य पाठ की शुरुआत हुई।

बरेली की कवयित्री अंजलि श्रीवास्तव ने नारी शक्ति पर अपनी रचना सुनाते हुए कहा, “मुहब्बत और ममता की हंसी का मंजर सजाती हूं, मैं नारी हूं, हमेशा चोट सहकर मुस्कुराती हूं।” उनकी पंक्तियों ने नारी के धैर्य और सामर्थ्य को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कवि डॉ. उमाशंकर राही ने भगवान राम के आदर्शों का संदेश देते हुए कहा, “राम का तुम्हें मंदिर बनाना है तो पहले मन का रावण मारो।” वहीं, रेणु उपाध्याय ने रिश्तों की अहमियत पर अपनी रचना के जरिए कहा, “सच्चा रिश्ता कमाना पड़ता है, दांव दिल का लगाना पड़ता है।”

कवि शोभित सक्सेना की पंक्तियों पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं। उन्होंने कहा, “नहीं गोरों की मक्कारी से हम सदियों परतंत्र रहे, बस अपनों की गद्दारी से।” उनकी कविता ने श्रोताओं को इतिहास और आपसी विश्वास के पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित किया।

भरतपुर (राजस्थान) के बाबूलाल डींगिया ने हास्य-व्यंग्य से माहौल को खुशनुमा बना दिया। रावण दहन पर राजनीतिक कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “रावण तू नहीं जलेगा तो क्या तेरा बाप जलेगा?” उनकी हास्य रचनाओं पर पंडाल ठहाकों और तालियों से गूंज उठा।

डॉ. गीतम सिंह ने विरह और आत्मविश्वास को स्वर देते हुए सुनाया, “दिल के जख्मों को अब खुद ही सीना हमने सीख लिया, उनसे कह दो उनके बिन भी जीना हमने सीख लिया।” वहीं, अवधेश सक्सेना ‘दद्दा’ ने युवाओं और देश की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “युवा देश का भ्रमित, देश का क्या होगा, अश्रु भरा संदेश देश का क्या होगा।”

पूरी रात चले कवि सम्मेलन में दिल्ली से आए सुनहरी लाल ‘तुरंत’, मोहन मोही, विवेक चतुर्वेदी सहित अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।

कार्यक्रम के अंत में आयोजक समाजसेवी अरुण अग्रवाल, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सचिन अग्रवाल ‘बंटी’, उपाध्यक्ष संदीप सक्सेना और डॉ. प्रभाकर मिश्र ने कवियों का माल्यार्पण कर स्मृति चिह्न भेंट किए और उन्हें सम्मानित किया।

इस अवसर पर रतन कुमार जिंदल, संकेत मोहन शर्मा, धनसुख अग्रवाल, मनमोहन शर्मा, संजीव शर्मा, शिवकिशोर माहेश्वरी, अभिनव सक्सेना, शिवकुमार गुप्ता, रजत गुप्ता, कार्तिक अग्रवाल, राहुल वार्ष्णेय सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

 

 

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