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सहसवान: लंबे समय तक पेट की परेशानी को न करें नजरअंदाज, हो सकती है क्रॉनिक कोलाइटिस: डॉ. अमोल गुप्ता।

लंबे समय तक पेट की परेशानी को न करें नजरअंदाज, हो सकती है क्रॉनिक कोलाइटिस: डॉ. अमोल गुप्ता।

प्रधान संपादक, रवि कुमार शाक्य 

सहसवान, बदायूं। बार-बार दस्त आना, पेट में लगातार दर्द, मल में बलगम या खून आना, पेट फूलना, गैस, वजन घटना और कमजोरी जैसी समस्याएं यदि लंबे समय तक बनी रहें तो इन्हें सामान्य पेट खराब होने की समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये क्रॉनिक कोलाइटिस (Chronic Colitis) जैसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं। यह जानकारी डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल, सहसवान के कुशल होम्योपैथिक चिकित्सक, चर्म एवं दीर्घकालिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अमोल गुप्ता ने दी है।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि क्रॉनिक कोलाइटिस बड़ी आंत में लंबे समय तक रहने वाली सूजन की स्थिति है, जिससे रोगी का पाचन तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित होता है और उसकी दैनिकचर्या पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अनियमित खान-पान, मानसिक तनाव, संक्रमण, प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी समस्याएं तथा अस्वास्थ्यकर जीवनशैली इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सही जांच और उपचार शुरू कर दिया जाए, तो अधिकांश रोगियों में इसके लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। लगातार पेट दर्द, बार-बार दस्त, मल में रक्त या बलगम तथा तेजी से वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई देने पर बिना किसी देरी के विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक की सलाह से रक्त जांच, मल परीक्षण, कोलोनोस्कोपी एवं अन्य आवश्यक जांचें कराई जाती हैं।

होम्योपैथिक उपचार के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि होम्योपैथी में रोगी की शारीरिक बनावट, मानसिक स्थिति, रोग के मूल कारण तथा संपूर्ण स्वास्थ्य का विस्तृत मूल्यांकन कर व्यक्तिगत आधार पर उपचार किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य रोग के लक्षणों को कम करना, पाचन क्षमता में सुधार लाना तथा रोग की पुनरावृत्ति की संभावना को न्यूनतम करना होता है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि कोई भी मरीज अपनी चल रही दवाएं चिकित्सकीय परामर्श के बिना खुद बंद न करे।

डॉ. अमोल गुप्ता ने आम जनता से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील करते हुए कहा कि हमेशा संतुलित एवं सुपाच्य भोजन का सेवन करें, तले-भुने और अत्यधिक मसालेदार खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, नियमित रूप से योग व प्राणायाम करें, तनाव को नियंत्रित रखें और पूरी नींद लें। उन्होंने अंत में यही संदेश दिया कि समय पर पहचान और उचित उपचार से क्रॉनिक कोलाइटिस के मरीज पूरी तरह सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं, इसलिए पेट संबंधी समस्याएं लगातार बने रहने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

 

 

 

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