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आजम खान के मामले में निष्पक्ष न्याय की मांग, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन।

पटियाली में सपा प्रतिनिधिमंडल ने कानूनी कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा कराने की उठाई मांग।

संवाददाता, वसीम कुरैशी

पटियाली, कासगंज। समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने आजम खान के खिलाफ कथित प्रतिशोधात्मक और उत्पीड़नकारी कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। गुरुवार को प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन पटियाली के उपजिलाधिकारी सुशांत सांवरे को सौंपकर मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की।

सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अब्दुल हफीज गांधी ने कहा कि कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति को परेशान करना। उन्होंने आजम खान के विरुद्ध चल रही विभिन्न कानूनी कार्यवाहियों की निष्पक्ष समीक्षा करने और उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव प्रेम सिंह शाक्य ने कहा कि जांच एजेंसियों को अपनी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से और कानून के दायरे में रहकर करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

वरिष्ठ सपा नेता ईसार अली ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय, निष्पक्षता और मानवीय गरिमा के महत्व पर जोर दिया। वहीं, पटियाली बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष कुंवर पाल यादव ने कहा कि कानून का शासन और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया लोकतंत्र के प्रमुख आधार हैं। प्रत्येक व्यक्ति के कानूनी अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।

सपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष राशिद अली ने कहा कि बार-बार नई प्राथमिकी दर्ज होने और कानूनी कार्यवाहियां चलने से किसी व्यक्ति के लगातार हिरासत में रहने की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका गंभीर विषय है। उन्होंने सभी मामलों में ठोस साक्ष्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए जाने की आवश्यकता बताई।

निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की मांग

ज्ञापन में राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया कि वह संबंधित सक्षम प्राधिकारियों तक प्रतिनिधिमंडल की चिंताओं को पहुंचाएं और आजम खान के विरुद्ध चल रही जांचों एवं कानूनी कार्यवाहियों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह करें।

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी वैधानिक जांच को रोकने की नहीं है, बल्कि सभी मामलों में कानून के समान और निष्पक्ष अनुपालन की है।

इस दौरान अरविंद शाक्य, चंदन पांडे, मोहम्मद असलम अंसारी, मोहम्मद शाहिद, हिकमत अली, मुशीर अहमद अंसारी और रहीस आलम सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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