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गंजडुंडवारा में मुशायरा और कवि सम्मेलन ने बांधा समां, कौमी एकता के संदेश से गूंजा मंच।

एसडीएम सुशांत सांवरे ने किया शुभारंभ, शायरों और कवियों की रचनाओं पर झूमे श्रोता।

संवाददाता, जुम्मन कुरैशी 

गंजडुंडवारा, कासगंज। नगर के एटा रोड स्थित अमीर खुसरो स्कूल में अंजुमन बाहर-ए-अदब की ओर से कुल-हिंद मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन एसडीएम पटियाली सुशांत सांवरे ने फीता काटकर किया। साहित्यिक आयोजन में शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, भाईचारे और कौमी एकता का संदेश दिया। मंच से प्रस्तुत कलाम और कविताओं ने श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।

कार्यक्रम में एसडीएम न्यायिक मोहम्मद नासिर, एसडीएम आतिश कुमार, सीओ अमित कुमार और चेयरमैन प्रतिनिधि अजहर हुसैन सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन हिलाल बदायूंनी ने किया, जबकि शायर अकील नोमानी ने नात-ए-पाक पेश कर महफिल का आगाज किया। आयोजन की व्यवस्थाओं में शायर आमिर शेख ने संयोजक और मुख्य व्यवस्थापक की भूमिका निभाई।

मुशायरे में अकील नोमानी, खुर्शीद हैदर, शरीफ भारती, इब्राहीम अली जीशान, सलमान जफर, राशिद राहत, वसीम झिंझानवी, नौशाद अनगढ़, अलीम वाजिद, निकहत मुरादाबादी, इल्मा हाशमी, नईम अख्तर नईम और फकरी मेरठी समेत कई शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। शायरों ने अपनी शायरी के जरिए सामाजिक सद्भाव, इंसानियत और आपसी एकता की अहमियत को रेखांकित किया।

महफिल के दौरान वसीम झिंझानवी ने तिरंगे के प्रति प्रेम और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देते हुए पढ़ा, “हिंदू मुस्लिम का यह दुलारा लगता है, हमको तिरंगा जान से प्यारा लगता है।” वहीं खुर्शीद हैदर ने इंसान की पहचान उसके चरित्र से करने का संदेश दिया। अकील नोमानी ने गम और मन की भावनाओं पर आधारित कलाम पेश किया, जबकि नईम अख्तर नईम ने जुल्म और झूठ के खिलाफ अपनी रचना से श्रोताओं का ध्यान खींचा।

सलमान जफर ने अपनी शायरी के जरिए कट्टरता से दूर रहने और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उनके कलाम को भी श्रोताओं ने सराहा। पूरे आयोजन में कौमी एकता और सामाजिक भाईचारे का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया।

इस अवसर पर चेयरमैन प्रतिनिधि अजहर हुसैन ने कहा कि मुशायरे और कवि सम्मेलन जैसे साहित्यिक आयोजन समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और एकता को मजबूत करते हैं। ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों, शायरों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। आयोजन समिति से जुड़े जहांगीर तुकतानी, सऊद अहमद अंसारी, मोहम्मद अमन, मोहम्मद फिरोज, डॉ. मुस्तकीम अंसारी और बरकत अली सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

 

 

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