Breaking News

बरेली: उर्स-ए-रज़वी से उठा तालीम, तहज़ीब और तर्बियत का पैग़ाम, अदनान रज़ा बोले- नशा और फ़िज़ूलख़र्ची नई नस्ल का सबसे बड़ा दुश्मन।

बरेली: उर्स-ए-रज़वी से उठा तालीम, तहज़ीब और तर्बियत का पैग़ाम, अदनान रज़ा बोले- नशा और फ़िज़ूलख़र्ची नई नस्ल का सबसे बड़ा दुश्मन।

संवाददाता: मोहम्मद वसीम

बरेली: 108वें उर्स-ए-रज़वी के समापन अवसर पर दरगाह आला हज़रत से सिर्फ रूहानी महफ़िल का संदेश ही नहीं, बल्कि समाजी इस्लाह, दीनी तालीम और नौजवानों की तर्बियत का एक मजबूत पैग़ाम भी पूरी दुनिया को मिला। कुल शरीफ़ से पहले नबीरा-ए-आला हज़रत और ऑल इंडिया रज़ा एक्शन कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर घरों में दीन का माहौल नहीं होगा, तो आने वाली नस्लें अपने बुज़ुर्गों की पहचान और विरासत दोनों से कोसों दूर हो जाएंगी।

ख्वाजा कुतुब स्थित आरएसी मुख्यालय बैतुर्रज़ा से लेकर मरकज़ी मस्जिद बीबी जी तक रोशनी, भव्य सजावट और अकीदतमंदों की भारी भीड़ ने पूरे इलाके को एक मुकम्मल रूहानी फिज़ा में बदल दिया। सुबह शुरू हुई नूरानी महफ़िल देर रात तक जारी रही, जिसमें तिलावत, नात, मनक़बत और प्रभावशाली तक़रीरों के जरिए आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान की अजीम इल्मी और रूहानी विरासत को याद किया गया।

अपने संबोधन में मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने विशेष तौर पर नौजवान पीढ़ी को नसीहत देते हुए कहा कि नशा, दिखावा और फ़िज़ूलख़र्ची आज की नई नस्ल को अंदर से खोखला कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मेहनत की हलाल कमाई, बेहतर सेहत और मजबूत ईमान ही एक कामयाब ज़िंदगी की असली पूंजी हैं। उन्होंने आह्वान किया कि इश्क-ए-रसूल को दिलों में बसाइए और आला हज़रत की तालीमात को घर-घर पहुंचाइए, क्योंकि तभी समाज में उच्च (अखलाक) और अमल की रोशनी कायम रह सकती है।

मौलाना ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि माता-पिता चाहते हैं कि उनकी औलाद उनकी वफात के बाद भी दुआ और फ़ातिहा से अपना रिश्ता मजबूत रखे, तो उन्हें सबसे पहले अपने घरों के अंदर कुरआन, नमाज़ और बुनियादी दीन की तालीम को ज़िंदा करना होगा। यह महज़ कोई मज़हबी रस्म नहीं, बल्कि अपनी नस्लों को बचाने की एक बहुत बड़ी सामाजिक और नैतिक ज़िम्मेदारी है।

महफ़िल के दौरान मुफ़्ती उमर रज़ा और मौलाना सलीम रज़ा ने भी अपनी तकरीर में आला हज़रत की बेमिसाल इल्मी खिदमात और उम्मत की सही रहनुमाई पर विस्तार से रोशनी डाली। कार्यक्रम का संचालन हाफ़िज़ इमरान रज़ा बरकाती ने बखूबी किया। अंत में आला हज़रत का बेहद मकबूल और रूहानी सलाम “मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम” पढ़ा गया, जिसके बाद मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने देश में अमन-चैन, उम्मत की सलामती और पूरी इंसानियत के लिए विशेष दुआ कराई।

उर्स के समापन के बाद बैतुर्रज़ा, बिहारीपुर करौलान, ख़लील स्कूल, कुल्हाड़ापीर और रेलवे जंक्शन क्षेत्र समेत विभिन्न स्थानों पर व्यापक पैमाने पर लंगर-ए-आम का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान बैतुर्रज़ा पर ज़ायरीन की सहूलियत के लिए विशेष रूप से शिकंजी और आइसक्रीम का भी इंतज़ाम किया गया, जिससे भीषण गर्मी और सफर से थके दूर-दराज़ से आए अकीदतमंदों को काफी राहत मिली।

उर्स के तीनों दिन ऑल इंडिया रज़ा एक्शन कमेटी (RAC) के वॉलन्टीयर्स पूरी मुस्तैदी के साथ ज़ायरीन की खिदमत में दिन-रात जुटे रहे। चादरों के जुलूसों को सुरक्षित दरगाह तक पहुंचाने, यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करने और कुल शरीफ़ संपन्न होने के बाद ज़ायरीन को बस स्टैंड व रेलवे स्टेशनों तक पहुंचाने में उन्होंने बेहद सराहनीय भूमिका निभाई। इस दौरान जबलपुर से आए सरफ़राज़ आलम ख़ां की टीम ने भी दरगाह पर हाजिरी दी और मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी से मुलाकात कर दुआएं प्राप्त कीं।

108वें उर्स-ए-रज़वी का यह ऐतिहासिक समापन सिर्फ एक धार्मिक आयोजन का अंत नहीं, बल्कि तालीम, तहज़ीब, आपसी भाईचारे, इंसानियत की खिदमत और समाजी सुधार के उस साझा पैग़ाम का गवाह बन गया, जो आने वाली पीढ़ियों को हमेशा सही दिशा दिखाता रहेगा।

Spread the love

Check Also

राजकीय महिला महाविद्यालय में एनएसएस के तहत नशामुक्त भारत अभियान: छात्राओं ने निकाली साइकिल रैली, दिलाई गई शपथ।

राजकीय महिला महाविद्यालय में एनएसएस के तहत नशामुक्त भारत अभियान: छात्राओं ने निकाली साइकिल रैली, …