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गंजडुंडवारा में जुलूस-ए-मुहम्मदी को लेकर उलेमा की अपील: डीजे, नाच-गाने और स्प्रे के इस्तेमाल से परहेज करने का आह्वान।

गंजडुंडवारा में जुलूस-ए-मुहम्मदी को लेकर उलेमा की अपील: डीजे, नाच-गाने और स्प्रे के इस्तेमाल से परहेज करने का आह्वान।

संवाददाता, वसीम कुरैशी

गंजडुंडवारा, कासगंज। कासगंज जनपद के गंजडुंडवारा क्षेत्र में ‘तहरीके खिदमत-ए-इस्लामी’ की ओर से आगामी जुलूस-ए-मुहम्मदी को लेकर उम्मत के नाम एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया गया है। संगठन के अध्यक्ष कारी अतीक अहमद बरकाती की मौजूदगी में क्षेत्र के प्रमुख उलेमा-ए-किराम की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि जुलूस के दौरान तेज आवाज वाले डीजे, नाच-कूद, स्प्रे और ऐसे अन्य आयोजनों से पूरी तरह परहेज किया जाए, जिनका शरीयत से कोई मेल नहीं है।

उलेमा-ए-किराम ने आमजन से अपील की है कि जुलूस-ए-मुहम्मदी को पूरी तरह सादगी, आपसी मोहब्बत, अदब और एहतराम के साथ निकाला जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तेज आवाज वाले डीजे के इस्तेमाल से बीमारों, बुजुर्गों और स्थानीय रहवासियों को भारी असुविधा होती है, जबकि इस्लाम धर्म हमेशा दूसरों को राहत देने और तकलीफ से बचाने का संदेश देता है।

इस बैठक और अपील के दौरान क्षेत्र के कई गणमान्य उलेमा और जिम्मेदार लोग मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से कारी अतीक अहमद बरकाती, कारी अनीसुर्रहमान, मौलाना मुफीद आलम, कारी जुल्फिकार रज़ा, मौलाना फरीद साहब, कारी जावेद साहब, कारी इस्लाम साहब, हाफिज अब्दुल सुब्हान, मुफ्ती नसीमुद्दीन, मौलाना अब्दुल खालिद, रहीस अहमद, मौलाना जैनुल आबेदीन, हाफिज जैनुल आबेदीन, कमर रज़ा, मौलाना रियाज़ुद्दीन, मौलाना रियाज़ अहमद मिस्वाही, हाफिज शान मुहम्मद, कारी नाजिम और हाफिज शाहिद शामिल रहे।

तमाम उलेमा-ए-अहले सुन्नत ने एक स्वर में क्षेत्रवासियों से अनुरोध किया है कि इस पवित्र आयोजन को पूरी तरह शांतिपूर्ण, मर्यादित और अनुशासित तरीके से संपन्न कराया जाए।

 

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